मानव विकास और पोषण से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं को नया आयाम देते हुए वैज्ञानिकों ने पाया है कि इंसानी मस्तिष्क के तेजी से विकास में प्रोटीन के साथ-साथ प्राकृतिक शर्करा की भी निर्णायक भूमिका रही है।
प्रतिष्ठित पत्रिका ‘साइंस’ (Science) में प्रकाशित एक बहु-केंद्रीय अध्ययन के अनुसार, प्रारंभिक मानव मस्तिष्क के विकास को गति देने में ‘ड्यूल-फ्यूल रणनीति’ यानी मांस और ग्लूकोज दोनों का संयुक्त योगदान रहा। सिडनी विश्वविद्यालय की प्रोफेसर जेनी ब्रांड-मिलर और ग्लासगो विश्वविद्यालय की पुरातत्वविद् करेन हार्डी द्वारा किए गए शोध में स्पष्ट किया गया कि जहां मांस ने अमीनो एसिड और सूक्ष्म पोषक तत्व दिए, वहीं फलों और स्टार्च से मिलने वाले प्राकृतिक ग्लूकोज ने मेटाबॉलिक रूप से महंगे मानव मस्तिष्क को जरूरी ऊर्जा प्रदान की।
पिछले 40 लाख वर्षों में इंसानी दिमाग का वजन 300 ग्राम से बढ़कर लगभग 1,500 ग्राम हो गया। अध्ययन के गणितीय मॉडल से पता चलता है कि शुरुआती होमिनिन के आहार में 25% से अधिक ऊर्जा प्राकृतिक शर्करा से आती थी। आग और खाना पकाने के प्रचलन से पहले फल और शहद ही मस्तिष्क की ग्लूकोज मांग को पूरा करते थे। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह अध्ययन यह भी स्पष्ट करता है कि इंसानों में मीठे स्वाद के प्रति स्वाभाविक जैविक आकर्षण क्यों होता है।
