नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 के त्वरित क्रियान्वयन की दिशा में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अहम प्रशासनिक फैसला लेते हुए बहु-एजेंसी समितियों की व्यवस्था खत्म कर दी है। अब चयनित 8 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में जिला कलेक्टरों को सीधे नागरिकता आवेदन स्वीकृत करने की शक्ति दे दी गई है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 के तहत लंबित नागरिकता आवेदनों के निपटारे की जिम्मेदारी जिलाधिकारियों (District Collectors) को सौंप दी है। 19 अगस्त को जारी किए गए आधिकारिक आदेश के तहत गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम (जनजातीय क्षेत्रों को छोड़कर), त्रिपुरा (जनजातीय क्षेत्रों को छोड़कर), जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के जिलाधिकारियों को आवेदन प्राप्त करने, उनकी जांच करने और नागरिकता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है।
नागरिकता (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 के लागू होने से 11 मार्च 2024 को गठित वे एम्पावर्ड कमेटियां निष्प्रभावी हो गई हैं, जिनमें जनगणना, डाक और इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी शामिल थे। नए नियमों के तहत अब जिलाधिकारी नागरिकता कानून की धारा 6B के अंतर्गत आवेदकों के दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे और उनकी पात्रता तय करेंगे। यह व्यवस्था पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए छह गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदायों के शरणार्थियों के लिए नागरिकता प्रक्रिया को आसान और तेज बनाएगी।
