ब्यूरो रिपोर्ट: नेपाल के आसमान से आफत बनकर बरसी बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह तबाह कर दिया है। काठमांडू घाटी से लेकर दूरदराज के पहाड़ी इलाकों तक केवल मलबे के ढ़ेर, उफनती नदियां और उजड़े हुए आशियाने नजर आ रहे हैं। बागमती, नारायणी और कोशी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर बस्तियों में दाखिल हो चुका है।
जमीनी हालात का आंखों देखा मंजर
घरों में समाया पानी: काठमांडू के निचले इलाकों में पहली मंजिल तक पानी और गाद भर चुकी है। बल्खु, कुपंडोल और कालिमाटी जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में गाड़ियां नाव की तरह तैरती दिखीं।
सड़कों का नामोनिशान मिटा: पृथ्वी राजमार्ग समेत राजधानी को जोड़ने वाले प्रमुख रास्ते भूस्खलन के चलते कई जगहों पर पूरी तरह कट गए हैं। सैकड़ों यात्री और वाहन बीच रास्तों पर फंसे हुए हैं।
राहत व बचाव में जुटी सेना: नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल (APF) और स्थानीय प्रशासन की टीमें नावों और हेलिकॉप्टरों के जरिए फंसे हुए लोगों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं।
ग्राउंड से आवाज: ‘पलक झपकते ही सब कुछ बह गया’
बागमती किनारे अपने उजड़े घर के बाहर खड़े स्थानीय निवासी रमेश श्रेष्ठ की आंखें नम हैं। उन्होंने कहा, “रात करीब दो बजे पानी का तेज बहाव आया। चीख-पुकार मची तो हम केवल अपनी जान बचाकर छत की तरफ भागे। जीवनभर की कमाई, घर का सामान और मवेशी सब कुछ पानी में विलीन हो गए। अब सिर्फ मलबे से अपने जरूरी दस्तावेज खोजने की कोशिश कर रहे हैं।”.
प्रमुख चुनौतियां
बिजली और नेटवर्क ठप: प्रभावित जिलों में ट्रांसफार्मर डूबने और मोबाइल टावरों में खराबी आने से संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित है।
पेयजल और स्वास्थ्य संकट: बाढ़ का गंदा पानी पीने के पानी की लाइनों में मिलने से जलजनित बीमारियों (Waterborne Diseases) के फैलने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
मौसम का मिजाज: मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 से 48 घंटों में कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने का अनुमान है, जिससे राहत कार्यों में बाधा आ सकती है।
सरकार ने आपातकालीन नियंत्रण कक्ष स्थापित कर प्रभावितों को सूखा राशन, तिरपाल और दवाएं पहुंचाने का काम तेज कर दिया है, लेकिन लगातार हो रहे लैंडस्लाइड राहत दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
